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सोमवार, 28 दिसंबर 2009

TRP नहीं अब ज़रुरत है CRP की


मीडिया के मैंने चार उद्देश्य पढ़े थे

१)सूचित करना

२) शिक्षित करना

३) मानवीय मूल्यों का प्रेषण

४) मनोरंजन करना



लेकिन आज मै मीडिया को केवल एक ही उद्देश्य का निर्वहन करते देखता हूँ, और वो उद्देश्य है मनोरंजन करना

जो बिकता है वो दिखाने के फेर में मीडिया उलझ गयी है, लेकिन जो बिकता है वो दिखाया जाए या जो जनता देखे उसे दिखाया जाए ये कहा तक उचित है ?



१)--अगर मै अपने माँ से कहूं की मुझे मांस अच्छा लगता है तो क्या मेरी माँ मुझे वह खिलाएगी (अगर मै शाकाहारी हू) नहीं वह मुझे और सुस्वादु भोजन बनाकर खिलाएगी, और कोशिश करेगी की मै मांस की ओर प्रवुत्त न हूँ



२)--अगर कोई शराब की मांग करे तो क्या उसे उपलब्ध कराया जाये



३)--लोगों को अगर बिना कपड़ों की फ़िल्में दिखाए जाये तो वो ज्यादा पसंद तो क्या अब हमें वो दिखाना चाहिए

उत्तर एक ही है नहीं

तो ये कहना कहाँ तक उचित है की जो बिकता है वो दिखाओ या जो दिखता है वो दिखाओ ?

लेकिन TRP के फेर में उलझी मीडिया शायद ये नहीं समझ रही है, सभी एक ही चाल चल रहे है

NEWS CHANNEL के नाम पर बीसियों चैनल आ रहे है, हर जगह केवल एक ही होड़ रेटिंग की ,

लेकिन अब ज़रुरत है TRP के मोह को तोड़ने की , और CRP को अपनाने की

CRP यानि CONTENT RATING POINT



अब कुछ चैनल को आगे आना होगा और एक CRP संस्था की स्थापना करनी होगी, जो चैनल की मोनिटरिंग करे और कंटेंट के आधार पर रेट करे , इस रेटिंग को प्रसारित किया जाये ताकि आम जन जान सकें की कौन सा चैनल अच्छा कंटेंट दिखा रहा है , और फिर उस चैनल को देख सके , ताकि जो चैनल INTERNET से रिसर्च उठा कर सनसनी खेज़ प्रोग्राम बना देते है और बहुत सा रेटिंग ले लेते है उनके कारन आम जनता की दुर्गति को रोका जा सके और हर बार हतोत्साहित और डराने की जगह लोगो को प्रोत्साहित कर श्रेष्ठ कार्य हो सके

बुधवार, 14 अक्टूबर 2009

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं


बहुत दिनों बाद आज इस ब्लॉग का रुख किया है
लेकिन सार्थक श्री गणेश करने से पहले आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये......


दीपावली पर्व है, उत्साह का उल्लास का
दीपावली गान है , सौख्य का समृद्धि का
दीपावली "सुयश" है , असत्य पर सत्य की विजय का
दीपावली पुष्प है , तेज से तम के विनाश का
लेकिन प्रकाश बिखेरते;
इन दीपों की पंक्तियों में कई अधबुझे दिए है,

जिनके चारों ओर गहरा तिमिर पसरा है,
कितने ही लोग, भूखे है, गरीब है, लाचार है
दीपावली इनके लिए आनंद उल्लास का पर्व नही होती
एक अकेला दीपक चिर अन्धकार से लड़ सकता है
एक दीया कई दियों को प्रकाशित कर सकता है
हम कम से कम एक दीए का सहारा बन जाए
उसके जीवन में आनंद की ज्योति जलाएं
दीपावली सुपर्व को और सुंदर बनाएं........
---- सुयश वाखले
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं........