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रविवार, 10 जनवरी 2010

साल की सबसे बड़ी दर्दनाक खबर

दिन पहले एक बहुत ही दिल दहलाने वाला समाचार आया , वो ये की तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में सब-इंस्पेक्टर आर वेत्रिवल की बदमाशों ने हत्या कर दी, बदमाशों ने हत्या करने से पहले वेत्रिवल पर देसी बम और हथियारों से हमला किया, इंस्पेक्टर पर हमले और उनकी मौत के बीच जो प्रकरण हुआ वो काफी वीभत्स' था । जिसका मीडिया ने काफी मखौल उड़ाया । हमले के कारण इंस्पेक्टर का पाव कट गया था , पांव काटने के बाद वो मदद की गुहार लगते रहे , लेकिन कोई उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया ।

हादसे के बाद स्वास्थ्य मंत्री MRK पनीरसेलवम और राज्य के खेल मंत्री मोइदीन खान का कफील गुज़ारा , लेकिन किसी मंत्री का दिल इस इंस्पेक्टर की मदद करने के लिए नहीं पसीजा । इंस्पेक्टर आधे घंटे तक दर्द से तड़पते रहे , लोगों से मदद के लिए अनुनय-विनय करते रहे लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की । आधे घंटे बाद अम्बुलेंस आई लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी , इंस्पेक्टर वेत्रिवल मदद की प्रतीक्षा करते करते शहीद हो चुके थे ।


यह तो हुई खबर की बात , अब खबर, खबर को खबर बनानेवालों की , मैंने कम से कम १० अग्रणी समाचार चैनलों को ये समाचार चलते देखा , उनके पास तड़पते और विवश इंस्पेक्टर की सारी फुटेज थी की कैसे इंस्पेक्टर चिल्ला रहे थे ? कैसे वो रोये ? कैसे इंस्पेक्टर ने मदद की गुहार लगायी ? और कैसे इंस्पेक्टर शहीद हुए ? ये सारी फुटेज इन चैनलों ने चलाये ।

ये सारे चैनल खबर बना रहे थे , की २-२ मंत्रियों का काफिला गुज़रा , लेकिन कोई भी मदद की लिए नहीं रुका , इस फुटेज को कम से कम १० चैनलों ने चलाया , इसका मतलब वहा कम से कम २० मीडिया कर्मी तो रहे ही होंगे ,लेकिन ये मीडिया के खबरी इस खबर को तो फिल्माते रहे , कथित पत्रकार धर्म निभाते रहे , लेकिन शायद मानवता का धर्म भूल गए । सभी ने इस घटना को एक अवसर मानकर अपनी पूरी ताकत ' जूम इन और जूम आउट' करने में लगा दी , जब वेत्रिवल सड़क पर कराहते मदद के लिए गुहार लगा रहे थे , तब ये खबर नवीस 'पेन -टिल्ट ' करने में मशगुल थे । केवल इस बात का संतोष है की किसी रिपोर्टर ने वेत्रिवल को पीछे फ्रेम में रख कर PTC नहीं की (शायद ऐसा करने पर होने वाली निंदा का उन्हें स्पष्ट ज्ञान रहा होगा )

मेरा केवल एक ही प्रश्न है की मंत्रियो को अपने कर्तव्य की याद दिलाते , ये चौथे स्तम्भ के ठेकेदार अपना मानव धर्म क्यों भूल गए थे ? क्या ये स्वयं इंस्पेक्टर वेत्रिवल को अस्पताल नहीं पहुँचा सकते थे ? आखिर ये कब तक किसी आपदा में अपना सब कुछ गवां चुके , दुखी लोगों से पूछते रहेंगे --"अब आप कैसा महसूस कर रहे है ?"