मीडिया के मैंने चार उद्देश्य पढ़े थे
१)सूचित करना
२) शिक्षित करना
३) मानवीय मूल्यों का प्रेषण
४) मनोरंजन करना
लेकिन आज मै मीडिया को केवल एक ही उद्देश्य का निर्वहन करते देखता हूँ, और वो उद्देश्य है मनोरंजन करना
जो बिकता है वो दिखाने के फेर में मीडिया उलझ गयी है, लेकिन जो बिकता है वो दिखाया जाए या जो जनता देखे उसे दिखाया जाए ये कहा तक उचित है ?
१)--अगर मै अपने माँ से कहूं की मुझे मांस अच्छा लगता है तो क्या मेरी माँ मुझे वह खिलाएगी (अगर मै शाकाहारी हू) नहीं वह मुझे और सुस्वादु भोजन बनाकर खिलाएगी, और कोशिश करेगी की मै मांस की ओर प्रवुत्त न हूँ
२)--अगर कोई शराब की मांग करे तो क्या उसे उपलब्ध कराया जाये
३)--लोगों को अगर बिना कपड़ों की फ़िल्में दिखाए जाये तो वो ज्यादा पसंद तो क्या अब हमें वो दिखाना चाहिए
उत्तर एक ही है नहीं
तो ये कहना कहाँ तक उचित है की जो बिकता है वो दिखाओ या जो दिखता है वो दिखाओ ?
लेकिन TRP के फेर में उलझी मीडिया शायद ये नहीं समझ रही है, सभी एक ही चाल चल रहे है
NEWS CHANNEL के नाम पर बीसियों चैनल आ रहे है, हर जगह केवल एक ही होड़ रेटिंग की ,
लेकिन अब ज़रुरत है TRP के मोह को तोड़ने की , और CRP को अपनाने की
CRP यानि CONTENT RATING POINT
अब कुछ चैनल को आगे आना होगा और एक CRP संस्था की स्थापना करनी होगी, जो चैनल की मोनिटरिंग करे और कंटेंट के आधार पर रेट करे , इस रेटिंग को प्रसारित किया जाये ताकि आम जन जान सकें की कौन सा चैनल अच्छा कंटेंट दिखा रहा है , और फिर उस चैनल को देख सके , ताकि जो चैनल INTERNET से रिसर्च उठा कर सनसनी खेज़ प्रोग्राम बना देते है और बहुत सा रेटिंग ले लेते है उनके कारन आम जनता की दुर्गति को रोका जा सके और हर बार हतोत्साहित और डराने की जगह लोगो को प्रोत्साहित कर श्रेष्ठ कार्य हो सके
१)सूचित करना
२) शिक्षित करना
३) मानवीय मूल्यों का प्रेषण
४) मनोरंजन करना
लेकिन आज मै मीडिया को केवल एक ही उद्देश्य का निर्वहन करते देखता हूँ, और वो उद्देश्य है मनोरंजन करना
जो बिकता है वो दिखाने के फेर में मीडिया उलझ गयी है, लेकिन जो बिकता है वो दिखाया जाए या जो जनता देखे उसे दिखाया जाए ये कहा तक उचित है ?
१)--अगर मै अपने माँ से कहूं की मुझे मांस अच्छा लगता है तो क्या मेरी माँ मुझे वह खिलाएगी (अगर मै शाकाहारी हू) नहीं वह मुझे और सुस्वादु भोजन बनाकर खिलाएगी, और कोशिश करेगी की मै मांस की ओर प्रवुत्त न हूँ
२)--अगर कोई शराब की मांग करे तो क्या उसे उपलब्ध कराया जाये
३)--लोगों को अगर बिना कपड़ों की फ़िल्में दिखाए जाये तो वो ज्यादा पसंद तो क्या अब हमें वो दिखाना चाहिए
उत्तर एक ही है नहीं
तो ये कहना कहाँ तक उचित है की जो बिकता है वो दिखाओ या जो दिखता है वो दिखाओ ?
लेकिन TRP के फेर में उलझी मीडिया शायद ये नहीं समझ रही है, सभी एक ही चाल चल रहे है
NEWS CHANNEL के नाम पर बीसियों चैनल आ रहे है, हर जगह केवल एक ही होड़ रेटिंग की ,
लेकिन अब ज़रुरत है TRP के मोह को तोड़ने की , और CRP को अपनाने की
CRP यानि CONTENT RATING POINT
अब कुछ चैनल को आगे आना होगा और एक CRP संस्था की स्थापना करनी होगी, जो चैनल की मोनिटरिंग करे और कंटेंट के आधार पर रेट करे , इस रेटिंग को प्रसारित किया जाये ताकि आम जन जान सकें की कौन सा चैनल अच्छा कंटेंट दिखा रहा है , और फिर उस चैनल को देख सके , ताकि जो चैनल INTERNET से रिसर्च उठा कर सनसनी खेज़ प्रोग्राम बना देते है और बहुत सा रेटिंग ले लेते है उनके कारन आम जनता की दुर्गति को रोका जा सके और हर बार हतोत्साहित और डराने की जगह लोगो को प्रोत्साहित कर श्रेष्ठ कार्य हो सके